पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण
संदर्भ
- एनवायरनमेंटल रिसर्च: क्लाइमेट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन यह दर्शाता है कि विभिन्न जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों के अंतर्गत भारत के वन वर्ष 2100 तक लगभग दोगुना कार्बन संचित कर सकते हैं।
भारत के वनों द्वारा कार्बन भंडारण
- भारत के वन एक महत्वपूर्ण कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं, जो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जैव-भार और मृदा में संचित करते हैं।
- फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, भारत का कुल वन कार्बन भंडार 2013 में 6.94 बिलियन टन से बढ़कर 2023 में 7.29 बिलियन टन हो गया।
- कार्बन भंडार में भूमि-ऊपरी जैव-भार, भूमिगत जैव-भार, मृत लकड़ी, पर्ण-अपशिष्ट और मृदा कार्बनिक कार्बन शामिल हैं।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
- अध्ययन का अनुमान है कि शताब्दी के अंत तक भारत में वनस्पति कार्बन जैव-भार सभी उत्सर्जन मार्गों के अंतर्गत उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।
- कार्बन वृद्धि का मुख्य कारण अधिक वर्षा और वातावरण में बढ़े हुए कार्बन डाइऑक्साइड स्तर हैं।
- परिवर्तन के स्थानिक पैटर्न
- सबसे अधिक वृद्धि: शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र जैसे राजस्थान, गुजरात एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपेक्षित है।
- उच्च उत्सर्जन परिदृश्यों में इन क्षेत्रों में आर्द्रता की स्थिति सुधरने से वनस्पति कार्बन में 60% से अधिक वृद्धि हो सकती है।
- मध्यम वृद्धि: ट्रांस-हिमालय, गंगा के मैदानी क्षेत्र और दक्कन का पठार।
- सीमित वृद्धि: पश्चिमी घाट और हिमालय जैसे जैव-विविधता सम्पन्न क्षेत्र, जहाँ पारिस्थितिक संतृप्ति एवं जलवायु सीमाएँ विद्यमान हैं।
बढ़े हुए कार्बन भंडारण का महत्व
- जलवायु परिवर्तन शमन: वन कार्बन भंडारण वातावरणीय ग्रीनहाउस गैसों को कम कर जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायक है।
- कार्बन सिंक निर्माण: भारत ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) के अंतर्गत 2035 तक वन एवं वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5–4 बिलियन टन CO₂ समतुल्य कार्बन सिंक बनाने का संकल्प लिया है।
चिंताएँ
- कार्बन भंडारण में अनुमानित वृद्धि का अर्थ यह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन वनों के लिए लाभकारी है।
- जोखिम: वनों की कटाई, भूमि उपयोग परिवर्तन, वनाग्नि, कीट और चरम मौसम घटनाएँ इन लाभों को उलट सकती हैं।
- जलवायु परिवर्तन पारिस्थितिकी तंत्र की अस्थिरता और अचानक कार्बन उत्सर्जन का कारण बन सकता है।
भारत द्वारा उठाए गए कदम
- ग्रीन इंडिया मिशन: वनीकरण, पुनर्वनीकरण और क्षतिग्रस्त वन परिदृश्यों की पुनर्स्थापना पर केंद्रित।
- क्षतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम (CAMPA): गैर-वन उपयोग हेतु विचलित वन भूमि की भरपाई अन्यत्र वनीकरण गतिविधियों द्वारा सुनिश्चित करता है।
- राष्ट्रीय कृषि-वनीकरण नीति: किसानों को फसलों और पशुपालन प्रणालियों के साथ वृक्षों को एकीकृत करने हेतु प्रोत्साहित करती है।
- बॉन चैलेंज: भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया है।
- शहरी वनीकरण पहलें: नगर वन योजना सहित, शहरों में हरित क्षेत्र विकसित कर कार्बन अवशोषण और वायु गुणवत्ता सुधार में योगदान।
- वैश्विक पहलें: भारत REDD+ (वनों की कटाई और क्षरण से उत्सर्जन में कमी) में भाग लेता है, जिससे कार्बन अवशोषण और जलवायु वित्त तक पहुँच बढ़ती है।
आगे की राह
- वर्तमान घने वनों की सुरक्षा को सुदृढ़ करना आवश्यक है, क्योंकि परिपक्व वन अधिक कार्बन संचित करते हैं और नवरोपित वनों की तुलना में अधिक लचीले होते हैं।
- वनीकरण कार्यक्रमों में स्थानीय और विविध प्रजातियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि एकल प्रजाति वाले वृक्षारोपण को।
- वन प्रबंधन रणनीतियाँ क्षेत्र-विशिष्ट और जलवायु-सूचित होनी चाहिए, विशेषकर अर्ध-शुष्क क्षेत्रों, हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र एवं तटीय वनों के लिए।
स्रोत: TH
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